Tuesday, 12 February 2019

Kabeer dohe in hindi font

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                                  साईं इतनी दीजिएजा में कुटुंब समाए
                                   मैं भी भूखा  रहूंसाधू  भूखा जाए


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                                            बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
                                     पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर 

Dard Bhari Ghazal in Hindi

💘✍
सब को मालूम है मैं शराबी नहीं
फिर भी कोई पिलाए तो मैं क्या करूँ
सिर्फ़ एक बार नज़रों से नज़रें मिलें
और क़सम टूट जाए तो मैं क्या करूँ

मुझ को मैं कश समझते है सब वादा कश
क्यूँ के उनकी तरह लड़खड़ाता हूँ मैं
मेरी रग रग में नशा मुहब्बत का है
जो समझ में ना आए तो मैं क्या करूँ
सिर्फ़ एक बार...

हाल सुन कर मेरा सहमे-सहमे हैं वो
कोई आया है ज़ुल्फ़ें बिखेरे हुए
मौत और ज़िंदगी दोनों हैरान हैं
दम निकलने पाए तो मैं क्या करूँ
सिर्फ़ एक बार...

कैसी लत कैसी चाहत कहाँ की खता
बेखुदी में है अनवर खुदी का नशा
ज़िंदगी एक नशे के सिवा कुछ नहीं
तुम को पीना आए तो मैं क्या करूँ
सिर्फ़ एक बार...


💘✍
हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए हैं
ज़िंदा तो है जीने की अदा भूल गए हैं

एहसान का बदला यही मिलता है कली को
एहसान तो लेते हैसिला भूल गए हैं

मतलब के लिए करते है ईमान का सौदा
डर मौत का और ख़ौफ़--ख़ुदा भूल गए हैं

अब कोई भी क़ुर्बान किसी पर नही होता
यूँ भटकते है मंज़िल का पता भूल गए हैं


💘✍
वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है
बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है

उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से
तुम्हें ख़ुदा ने हमारे लिये बनाया है

महक रही है ज़मीं चांदनी के फूलों से
ख़ुदा किसी की मुहब्बत पे मुस्कुराया है

उसे किसी की मुहब्बत का ऐतबार नहीं
उसे ज़माने ने शायद बहुत सताया है

तमाम उम्र मेरा दम उसके धुएँ से घुटा
वो इक चराग़ था मैंने उसे बुझाया है


💘✍
 जी भर के देखा  कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं
कहाँ दिन गुज़ारा कहाँ रात की

उजालों की परियाँ नहाने लगीं
नदी गुनगुनाई ख़यालात की

मैं चुप था तो चलती हवा रुक गई
ज़ुबाँ सब समझते हैं जज़्बात की

सितारों को शायद ख़बर ही नहीं
मुसाफ़िर ने जाने कहाँ रात की

मुक़द्दर मेरे चश्म--पुर'अब का
बरसती हुई रात बरसात की
 जी भर...



💘✍

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
क्या गम है जिसको छुपा रहे हो

आँखों में नमी, हँसी लबों पर
क्या हाल है क्या दिखा रहे हो
क्या गम है जिसको...

बन जायेंगे ज़हर पीते पीते
ये अश्क जो पिए जा रहे हो
क्या गम है जिसको...

जिन ज़ख्मों को वक़्त भर चला है
तुम क्यों उन्हें छेड़े जा रहे हो
क्या गम है जिसको...

रेखाओं का खेल है मुक़द्दर
रेखाओं से मात खा रहे हो
क्या गम है जिसको...


💘✍
शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है


दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

वक़्त रहता नहीं कहीं थमकर
इस की आदत भी आदमी सी है

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी
एक तस्लीम लाज़मी सी है 
शाम से





Kabeer dohe in hindi font

📗                                     साईं   इतनी   दीजिए ,  जा   में   कुटुंब   समाए ।                                    मैं   भी ...